बड़ी बहन की बस में चुदाई – खुशबू दीदी को चोदा

Bahan ki bus me chudai
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बहन की बस में चुदाई करना एक ऐसा इत्तिफ़ाक़ था जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मैंने कभी नहीं सोचा था की दीदी के बड़े बड़े निपल्स कभी मेरे मुँह में होंगे।
ये कहानी पिछले साल की है, मेरे गांव में एक कार्यक्रम था जिसमे मुझे पहुंचना था , मम्मी और पापा २ दिन पहले ही चले गए थे क्युकी पारिवारिक शादी थी, मेरे कॉलेज में छुट्टी न मिलने की वजह से मैंने शादी के दिन ही निकला।
मैंने जिस दिन निकलने वाला था उसके एक दिन पहले रात को मेरे पास मम्मी की कॉल आयी की रोशन जब कल आना तोअपने साथ ख़ुशी को भी लिए आना। वो अकेले आएगी तो परेशान हो जाएगी इतनी दूर।
ख़ुशी मेरे मेरे बड़े पापा की बेटी है और दिल्ली में जॉब करती हैं , वो देखने में इतनी सुन्दर तो नहीं है है लेकिन काफी स्मार्ट हैं , बहुत मेन्टेन होक रहती है और उसका फिगर भी काफी अच्छा है।
वो मुझे इटावा के बस स्टैंड पे मिली और वह से हमने बरेली के लिए बस कर लिया। ख़ुशी दीदी काफी हॉट लग रही थी , दीदी के बूब्स दिन पर दिन बड़े होते जा रहे थे।
हम दोनों बस में बैठे, बस की सीट थोड़ी छोटी थी , तो दीदी का शरीर मुझसे चिपका हुआ था काफी। ख़ुशी दीदी की खुशबु भी मुझे मंत्रमुग्ध कर रही थी, हमारी जनरल बाते हो रही थी काम पढाई इन्ही सब बारे में।
बस के बहार एक लड़का पॉपकॉर्न बेच रहा था दीदी ने उसे बुलाया और पॉपकॉर्न लेने के लिए झुकी जिससे उनकी चूचिया मेरे घुटनो पे थी। ओह भाई , मज़ा आ गया अंदर से जैसे करंट दौड़ गयी।
मन में आया की दीदी की चूचियों को निचोड़ के दूध पि जा जाऊ। दीदी ने टॉप पहना हुआ था जिससे दीदी के बूब्स के उभार साफ़ पता चल रहे थे।
अब मैंने बहाने से अपनी कोहनी से दीदी की चूचियों को टच करने लगा, मेरा लंड खड़ा हो गया था। एक हाथ से मैं अपने लंड को बैठाने की कोसिस कर रहा था तो दूसरी तरफ दीदी के बूब्स को कोहनी से दबा रहा थ, और इसके साथ ही मैं उनसे बात भी कर रहा था जिससे उनको पता न चले कुछ भी।
लेकिन दीदी को सब समझ आ रहा था की मेरे हाथ उनके बूब्स पे है, थोड़ी देर बाद वो सो गयी तो मैं दीदी के पास झुका और उन्हें सूंघने लगा, क्या मस्त खुशबू आ रही थी, मैंने सोचा क्या बहन की बस में चुदाई कोई करता होगा क्या जिसका जवाब मेरे लंड ने टाइट होक दिया।
ये सब लेकिन दूर की बाते थी क्युकी मेरी गाड़ फट रही थी दीदी के बूब्स को हाथ लगाने में।
फिर मैंने हिम्मत करके दीदी के बूब्स को टच कर दिया। आह लगा जैसे मैं दूसरी दुनिआ में हु। दूसरी लड़कियों के बूब्स दबाने या चुदाई करने में अलग बात होती है लेकिन अपने बहन की चुदाई करना उसके बूब्स दबाने में अलग ही मज़ा आता है।
फ़िलहाल बूब्स दबाने की हिम्मत तो नहीं हो रही थी लेकिन हलके हलके मैं दीदी के बूब्स को सहला रहा था जिससे दीदी को पता न चले। लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ की ड्राइवर ने गाड़ी में ब्रेक लगा दिया और दीदी के चूचिया मेरे हाथो से दब गयी।
दीदी : आह। ये क्या हुआ अचानक ब्रेक क्यों लगी , और तुम ये क्या कर रहे हो ?
मैं – मैं कुछ नहीं कर रहा दीदी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया जिससे मेरा हाथ टच हो गया।
दीदी – रोशन इसे टच होना नई कहते है , और अब छोडो। अभी तक पकड़ा हुआ है।
मैंने झट से छोड़ दिया और सीधे बैठ गया। आंखे बंद किया तो बस एहि सपना आ रहा था की दीदी को लम्बा लेटा के दीदी की चूत में लंड डाल दू और बस में बहन की चुदाई कर दे।
मैंने थोड़ा रिस्क लेते हुए फिर से हाथ बहन के दूध पे रख दिया, दीदी ने इग्नोर किया, रस्ते में थोड़ा हचका लगता मैं बूब्स को दबा देता ।
दीदी ऐसे दिखा रही थी जैसे उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है।
मैंने अब जोर बढ़ने लगा और चूचियों को मसल दिया , दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जिससे मेरा हौसला और बढ़ गया। दीदी सोने की एक्टिंग कर रही थी शायद।
अब मैंने अपना हाथ नीचे से दीदी के टॉप में डाल दिया और ऊपर से बूब्स सहलाने लगा। दीदी ने मुझे देखा और कहा नहीं मानोगे न तुम?
दीदी मैं तो कुछ भी नहीं कर रहा। दीदी ने पीछे अपने ब्रा की हुक खोल दिया। जिससे अब उनकी चूचिया आज़ाद हो गयी अब बूब्स दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था क्युकी दीदी ने नंगे बूब्स काफी मुलायम और बड़े थे।
उस दिन मन भरके दीदी का बूब्स दबाया। हालाँकि दीदी ने न साथ दिया न मन किया। वो मन ही मन मज़ा ले रही थी।
अचानक से मैंने हाथ दीदी के लोअर में डाल दिया और चूत को रगड़ दिया।
दीदी – रोशन , ये नहीं अब ज्यादा हो रहा है।
मैं – हां दीदी बस अब नहीं थोड़ा सा करेंगे। इतना कहके मैंने अपनी ऊँगली ख़ुशी दीदी के चूत में डाल दिया। दीदी बोली को रोशन रहने दो कोई देख लेगा। मैंने दीदी की एक न सुनी और उनके चूत में फिंगरिंग करता रहा।
दीदी ने आँखे बंद कर लिया और मज़े लेने लगी।
ख़ुशी दीदी ने कहा की रोशन रहने दो मुझे अब बहुत नींद आ रही है और मेरा हाथ बहार निकल दिया। दीदी के मुलायम चूत में ऊँगली करने के बाद मेरा लंड रॉड बन चूका था अब उसे बहन की बस में चुदाई करनी थी।
दीदी ने अपना सर मेरे गोद में रख दिया और कहा की अब मुझे डिस्टर्ब न करना। सोने दो मुझे आराम से
मेरे गोद में सर रखके वो लेती हुई थी और दूसरे तरफ से मैं उनकी राइट साइड की चूचियों को दबा रहा था। मेरा मन दीदी की चूत चाटने का हो रहा था बस में लेकिन ये मुंकिन नहीं दिख रहा था।
मैंने लंड बहार निकल के दीदी के गालो में लगा दिया, दीदी को शायद मेरे लंड की खुसबू आयी वो बोली इसे अंदर करो तुम एक दम पागल हो गए हो क्या।
दीदी कोई हमे नई देख रहा हैं और मैंने कहा की आप सो जाओ, मैंने हलकी ताक़त का इस्तेमाल करते हुए लंड दीदी के मुँह में घुसाने लगा। दीदी इसका विरोध कर रही थी लेकिन मैं डाल दिया।
थोड़ी देर बाद दीदी ने भी लंड को चूसना सुरु कर दिया। लंड दीदी के गर्दन तक घुसेड़ दिया मैंने। इतना के बाद अब खुद पे काबू करना मुश्किल हो गया था, मैंने कहा की दीदी तुम्हारी चूत में लंड डालने का बेतहासा मन हो रहा है।
दीदी – रोशन तुझे शर्म तो आती नहीं है बहन की बस में चुदाई करना चाहता है इतने सरे लोगो के बीच में। मैंने कहा की दीदी क्या करू फिर नहीं हो रहा ह कण्ट्रोल।
दीदी ने कहा की चुप होक बैठ जाओ तुम एक दम।
रस्ते के एक होटल में बस रुकी , हम सब उतरे। सब लोग वाशरूम जा रहे थे या फिर कुछ खाने पीने के लिए उतरे थे।
मुझे थोड़ा सा मौका मिला मैंने दीदी से कहा दीदी चलो पीछे सीट पे चलते है वो पूरी होती है।
दीदी ने मन किया। मैंने कहा की प्लीज चलो आपको अपनी मम्मी की कसम।
दीदी गुस्से में देखि और चली गयी। मैंने झट से दीदी का टॉप उतर के बूब्स को मुँह में भर लिया और हाथ से चूत रगड़ने लगा। दीदी बोली की रोशन जल्दी करो कोई आ जायेगा।
मैंने अपना लंड निकला और तुरंत दीदी की चूत में डाल दिया। और भचभच दीदी को बस में चोदा। बिना कुछ सोचे समझे बस भकभक लंड डाल रहा था।
मैंने सारा वीर्य दीदी की चूत में गिरा दिया और फिर रिलैक्स हुआ। दीदी ने सीट को साफ़ किया और वाशरूम चली गयी। मैं अपनी सीट पे ही था।
बहन की बस में चुदाई का जो मज़ा आया वो मैं कभी भुला नहीं सकता। उसके बाद हम शादी में पहुंच गयी।
वह मेरी और दीदी की आंखे जब भी टकराती दीदी शर्मा जाती
शादी के रात मैंने दीदी को खली कमरे में बुलाया और शादी में बहन की चुदाई की फिर से। इसके बाद ये सिलसिला चलने लगा। दीदी जब भी इटावा आती तो उसे अक्सर ही पटक पटक के चोदता।
मै पढाई के बाद दिल्ली शिफ्ट हो गए और एक ही रूम में रहने लगे।
खुसबू दीदी को हर तरह से चोदा, उनके चूत की खुसबू अलग ही थी। कई बार तो वो खाना बना रही होती थी तो मैं जाके उनकी शॉर्ट्स नीचे कर देता और टांगे ऊपर करके वही चालू हो जाता।


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