बड़ी बहन के साथ हनीमून और हर्षिता को बुलाके थ्रीसम

bahan ke sath Honeymoon
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बहन के साथ हनीमून ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है मेरी ज़िंदगी का एक खूबसूरत हिस्सा है, लेकिन मेरी कहानी दुसरो से बहुत अलग है की कुइकी इसमें सस्पेंस है प्यार है और मज़ा है।

दीदी राकेश से बहुत ज्यादा प्यार करती थी और उसके साथ 7 साल से रिलेशनशिप में थी, बहुत मुस्किलो के बाद मेरे और राकेश के घरवाले इस शादी के लिए राजी हुए थे।
मेरी दीदी काफी सुन्दर है, 5 ft 3 इंच की हाइट है, 34B ब्रा साइज है और वो चस्मा लगाती है। वैसे तो मेरे घर में नैन नक्से सबके अच्छे है क्युकी मम्मी पापा भी सुन्दर है। कविता दीदी काफी सीधी सी है और आज की लड़कियों जैसे तेज़ नहीं है।
दीदी शादी को लेके काफी खुश थी और काफी पहले से ही पूरी तैयारियां कर रही थी। राकेश अक्सर ही घर आता रहता था और लम्बे वक़्त तक दीदी के कमरे में ही रहता था। शायद उनके बीच शारीरिक समबन्ध घर में भी बनते थे।
हनीमून के लिए दीदी ने बाली के लिए बुकिंग की थी जिसमे काफी पैसे लगे थे। और वो दीदी ने अपनी सैलरी से पे किया था। लेकिन उसके लिए उसे कोई दिक्कत नहीं थी क्युकी वहा वो अपने सपनो के दिनों को बीतने जा रही थी।
हमारे घर में बहुत बड़ा तूफान आया जब पता चला की राकेश के घरवालों ने ज्यादा दहेज़ माँगा है और राकेश ने भी अपने घरवालों का ही साथ दिया। दीदी ने जिस प्यार पे भरोसा करके अपना सब कुछ दे दिया था शरीर भी उसने पैसो के लालच में शादी को ना करने का फैसला कर दिया।
हमारे पापा एक छोटे व्यापारी है जिनकी बहुत बड़ी रकम देके शादी करने की हिम्मत नहीं थी। काफी मानाने और समझने के बाद भी राकेश के घरवाले नहीं माने।
दीदी का रो रो के बुरा हाल था, लेकिन कहा जाता है न की वक़्त सरे घावों को भर देता है , कुछ दिन बाद दीदी थोड़ा बेटर हुई और हम भी अपने डेली लाइफ की तरफ बढ़ने लगे।
बाली की बुकिंग तो हो चुकी थी और वहा कैंसिल करने पे बस २०% पैसे दे रहे थे , दीदी ने फैसला किया की वो वहा जाएँगी घूमने। मुझसे बोलै की ऋषि तू भी चलेगा क्या मेरे साथ।
मैंने हस्ते हुए कहा की दीदी आपने वहा हनीमून के लिए बुकिंग की है और अपने भाई के साथ जाओगी?
दीदी बोलो की अब कैंसिल करने का तो कोई फायदा है नहीं, अब लाइफ में जो गया है उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन आगे की ज़िंदगी तो ख़ुशी के साथ बीता सकते है।
मैंने कहा की सही कह रही है आप। फिर मै और दीदी बाली के लिए निकल गए। मैं अक्सर ही भाई बहन सेक्सी स्टोरीज की कहानिया पढता रहता था, मुझे लगा की कही मेरी कहानी भी तो नहीं बनने जा रही है। कविता दीदी है तो सेक्सी ही और चस्मा लगाके और मिया खलीफा लगती है।
कविता दीदी की चूचिया भी मिया खलीफा से छोटी नहीं है , घर में अक्सर जब वो बिना ब्रा के घूमती है तो उनके बूब्स दिख जाया करते है जिसे मै अक्सर इग्नोर कर देता हु क्युकी सगी बहन की चूचिया देखना भी पाप है।
प्लेन में मैंने दीदी से कहो की मै आपके साथ चल रहा हु तो मुझसे एक वादा करो की आप पुरे ट्रिप पे एक बार भी राकेश की न बात करोगी न उसे याद करोगी?
दीदी ने मुझसे अस्वाशन दिया की मै नहीं करुँगी। दीदी ने टॉप एंड जीन्स पहनी हुई थी और काफी सेक्सी लग रही थी। मैंने कभी सोचा नहीं भी नहीं था की ज़िंदगी ऐसा वक़्त भी लेके आएगी की मै सगी बहन के साथ हनीमून मानाने जाऊंगा।
मन ही मन मै सोच रहा था की कही अगर दीदी का मन बदल गया और दीदी की चुदाई का मौका मिल गया तो मेरी लौटरी निकल जाएगी। लेकिन ये एक कोरी कल्पना ही थी कुकी मेरी दीदी ऐसी नहीं थी और मै डरता भी काफी थ।
हम वहा पहुंचे तो लोकेशन बहुत सुन्दर थी लेकिन हर तरफ बस कपल ही दिख रहे थे शायद मै ऐसा इंसान रहा होऊंगा जो अपनी बहन के साथ बाली ट्रिप पे आया था।
मैंने दीदी से कहा दीदी यहाँ चारो तरफ से बस कपल्स ही है और हर तरफ प्यार दिख रहा है सिर्फ मै और तुम्ही भाई बहन है। मुझे काफी अजीब लग रहा है।
दीदी – हहहह तू भी न पागल है। हमे घूमना ही तो है दुसरो से क्या मतलब पागल लड़के।
मैं – हा दीदी आपकी बात सही है, लेकिन इतने प्यार भरे माहौल में कही मेरा हार्मोनल डिस्बैलेंस हो गया और मै कही कुछ गलत कर बैठा तो ?
दीदी – हाहाहा। तुम डराओ मत। तुम मेरे प्यारे सगे भाई हो और मुझे तुमपे पूरा भरोसा है। मै चाहती तो किसी दोस्त के साथ भी आ सकती थी लेकिन मुझे दूसरे और खुद पे भी इतना भरोसा नहीं था की काबू कर पाऊँगी ऐसी जगह पे। इसलिए तुम्हारे साथ आयी हुई क्युकी हमारा रिस्ता हमे रोक के रखेगा गलत काम करने से।
मैंने दीदी की बातो में हा में हा मिला दिया। हम होटल पहुंचे।
होटल रिसेप्शनिस्ट ने भी हमे कपल समझा और बोली की आप की जोड़ी सुन्दर है और हमे रूम की चाभी दी। मैंने और दीदी ने एक दूसरे की आँखों में देखा और हसने लगे। मैंने कहा की दीदी पुरे हफ्ते लोग हमे हस्बैंड वाइफ ही समझने वाले है बहन के साथ हनीमून कौन आता है यार दुखी होके बोला मै।
दीदी ने कहा चल पागल। उनके समझने से क्या होता है और अब मै सबको क्लियर भी नई करती रहूंगी की हम पति पत्नी नहीं भाई बहन है
असली झटका तो हमे तब लगा जब हमे होटल रूम के अंदर गए। बेड और रूम बहुत सजा हुआ था। होटल वालो ने मेरी सगी बहन की सुहागरात करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
रूम देखके दीदी की आँखों में अंशु आ गए उन्हें साडी बाते याद आने लगी , मैंने दीदी को समझाया और उन्हें गले से लगा लिया। दीदी बहुत रो रही थी
मै दीदी को चुप करा रहा था और उनके पीट पे हाथ फेर रहा था। दीदी की ब्रा मेरे हाथो में गड रही थी जिससे मुझे कुछ अनुभव हुआ। दीदी थोड़ा शांत हुई मैंने कहा की आप कपडे चेंज कर आओ।
दीदी कपडे बदल के नाईट ड्रेस में आयी जिसमे वो काफी सेक्सी लग रही थी, मेरा मन बस हो रहा था की बहन के साथ सुहागरात मना लू होनेमून पे। लेकिन मेरे संस्कार और डर मुझे रोक रहे थे।
कविता दीदी के बड़े बड़े संतरे कपडे फाड़ के बाहर आने के लिए तड़प रहे थे जैसे। मेरे अंदर का राक्षस जग रहे थे और बस लग रहा की कविता दीदी के साथ हनीमून करके दीदी को अपना हनी खिला दू।
मै अपने आप को काबू करते हुए लेट गया और दीदी भी बगल में आके लेट गयी। और बाते करने लगे भविस्य और कल घूमने की प्लानिंग को लेके की कहा कहा जाना है।
इतनी देर में दूर नॉक हुई, मैंने डोर खोला था तो वेटर था और 2 गिलास दूध लेके आया हुआ था। मैंने कहा की ये तो मैंने मंगवाया ही नहीं है दोस्त, वेटर बोलै की सर हमारे यहाँ जो भी गेस्ट नयी शादी के बाद यहाँ घूमने आते है तो उसके लिए हम स्पेशल दूध बनाते है जिससे उनकी रात अच्छी जाये।
अब मै उससे क्या ही बताता की मै वाइफ के साथ नहीं बल्कि बहन के साथ हनीमून मानाने आया हु। मैंने उससे दूध ले लिया लेकिन वो अभी भी वही खड़ा था।
मैं समझ गया और मैंने उसे 200 रूपये टिप दिया तब वो वहा से गया। दीदी ने कहा कौन था मैंने बोला की होटल की तरफ से दूध मिला है। दीदी हसने लगी और हम दोनों दूध पीके आराम करने लगे।
उस दूध में पता नहीं क्या मिलाया था उसने की मेरा लंड थोड़ी देर में एक दम टाइट हो गया। सेक्स की इतनी प्रबल इच्छा हुई की जो बी सामने मिल जाये उसकी चुदाई कर दू। मुझे कुछ समझ नई आ रहा था की अब मै क्या करू।
मै तुरंत वाशरूम गया और उस वक़्त कोई नई मिला तो दीदी को इमेजिन करके लंड हिला लिया। काफी देर तक लंड हिलाते रहने के बाद उसके अंदर से मटेरियल बाहर निकला और मुझे चैन आया। मुझे ख़ुशी थी की मैंने बहन के साथ हनीमून पे गलत काम करने से खुद को रोक लिया।
वो अद्भुत दूध था अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया , तभी मैंने देखा की दीदी भी जगके बैठी हुई है मुझसे बोली क्या हुआ तुझे परेशान सा क्यों है ?
मैंने कविता दीदी से बताया की उस दूध में ना जाने क्या था की मेरे अंदर कुछ हो रहा है बहुत तेज़। आप समझ रही ह न।
दीदी ने कहा हा तुम जाके वो करलो न वाशरूम में जो लड़के करते है सेल्फ सटिस्फैक्शन के लिए। मैंने कहा की दीदी मै वो भी कर चूका लेकिन इसने दूध में ऐसा पता नहीं क्या डाला है की मै नहीं काबू कर पा रहा हु।
मैं – दीदी अगर आप बुरा न मनो तो एक बात बोलू, आप मेरी बड़ी बहन है मुझे उम्मीद है आप मेरी परेशानी समझेंगी।
दीदी – हा बोल न ऋषि।
मैं – दीदी, मैं होटल वाले से बात करके एक कॉल गर्ल मंगवा लेता हु रूम में , जिससे मेरी परेशानी भी दूर हो जाएगी।
दीदी – ऋषी, तुझे पता भी क्या कह रहा है , अपने दीदी के साथ किसी कॉल गर्ल्स के साथ सेक्स करेगा ?
मैं – दीदी आप सो जाना और मै उसके साथ नीचे कर लूंगा और जल्दी से उसे वापस भेज दूंगा। दीदी बोली ठीक है।
मैंने होटल मैनेजर को कॉल किया और बोला की कोई लड़की मिलेगी क्या , होटल मैनेजर भी हरामी था बोला की सर पहली बार देखा की कोई मैरिड कपल कॉल गर्ल को बुला रहा है same रूम में वाइफ के सामने।
मैंने कहा की थोड़ी पर्सनल बात है आप नहीं समझोगी मुझे एक सुन्दर लड़की भेज दो काम रेट पे।
होटल मैनेजर बोला ठीक है भेजता हु जो आपको थ्रीसम के मज़े दे। और हसने लगा।
दीदी का मुँह अजीब सा बना हुआ था उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है और क्या होने वाला है।
तब तक एक हद से ज्यादा सुन्दर लड़की मेरे रूम में आयी और गज़ब बात ये थी की वो इंडियन थी , बड़े बड़े चूचे और गाड़ जैसे उसका जनम बस चुदने के लिए ही हुआ हो।
दीदी दूसरी तरफ मुँह करके सो गयी , बेड न हिले इसलिए मैंने एक गद्दा नीचे बिछा के हर्षिता को नीचे लेता लिया। जैसे ही मैंने हर्षिता को नंगा किया मेरी आंखे खुली रह गयी।
हर्षिता की चूचिया एक दम टाइट बड़ी और सुडौल थी , मुझे रहा नहीं गया और मैंने उसकी चूचियों को मुँह में भर लिया, मैं हर्षिता ने निप्पल्स को चूस रहा था और अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया, हर्षिता निप्पल्स को चूस चूस के पि रहा था मै और उसकी चूत को भी रगड़ रहा था।
हर्षिता- आह आह ओह आह येह बेबी। मज़ा आ रहा था।
मैंने हर्षिता को चुप कराया, कहा की आवाज़ न करो मेरी दीदी बगल में है उसे डिस्टर्ब होगा , हर्षिता हसने लगी और बोली की सेल तेरी बहन साइड में लेती और तू बहन की चुदाई करने के बजाये एक कॉल गर्ल को चोद रहा है।
दीदी लेते लेते सब सुन रही थी, मैंने हर्षिता को सीधा किया और अपना लंड हर्षिता के मुँह में डाल दिय। हर्षिता मेरा लंड घूमा घूमा के चूसने लगी और मना करने के बाद भी आवाज़ निकल रही थी।
मैंने हर्षिता के गर्दन तक अंदर क्र दिया अपने लंड को और उसके मुँह को चोदने लगा , दीदी ने कान पे तकिया रखके दबा लिया।
अब जैसे ही हर्षिता की चूत पे अपनी जीभ लगायी और जीभ को उसकी चूत के अंदर तक डाला हर्षिता तेज़ से बोलने लगी।
हर्षिता – आह वाह कुत्ते क्या चूत चाट रहा है तू और अंदर डाल अपनी जीभ को मेरे चूत में। आह चाट साले और चाट। कुत्ता है तू मेरा। चाट अच्छे से।
दीदी को भी अब रहा नहीं गया और हमारी तरफ मूड गयी और मुझसे बोली की तुझे शर्म नहीं आती है अपनी बड़ी दीदी के साथ हनीमून आया है और ऐसी गन्दी हरकते कर रहा है। बताती हु सब मै पापा को।
मै हर्षिता को हटाया और नंगा लंड दीदी के पास ले जाके बोला सॉरी दीदी पापा को मत बताना। दीदी की नज़र मेरे लौड़े पे ही थी मैं समझ गया की दीदी भी चुदवआना चाहती है लेकिन खुद से इस बारे में नहीं कह पा रही है।
मैंने दीदी की टंगे खोल दी २ पार्ट में और उनके ऊपर चढ़ के किश करने लगा, दीदी ने मुझे धक्का दिया और बोली की तू पागल हो गया है क्या सब बताउंगी मै घरपे।
कविता दीदी की साडी बाते इग्नोर करते हुए मैंने अपना हाथ उनके बड़े बड़े बूब्स पे रख दिया और दबा दिया। मै दीदी के होठो को चूस रहा था और उसके बूब्स को दबा रहा था।
दीदी मना करने की एक्टिंग कर रही थी और अंदर ही अंदर भाई का लंड लेना चाहती थी हनीमून में। मै जैसे ही अपना हाथ दीदी की चूत पे गया दीदी मुझसे चिपक गयी और किश में सपोर्ट करने लगी।
मैंने दीदी की चूत में फिंगरिंग की स्पीड बढ़ा दी और दीदी छटपटाने लगी, दीदी जैसे चुदने के लिए तैयार ही थी , लेकिन मै बहन की चुदाई इतनी आराम से नहीं करने वाला था, फिंगरिंग करने के बाद मैंने दीदी को छोड़ दिया और मैं हर्षिता के पास चला गय।
हर्षिता की चूत में जैसे ही मैंने लंड डाला वो चिल्ला दी, अरे बहन चोद रंडी हु तेरी बहन नहीं धीरे चोद साले। दूध की शक्ति की वजह से मै सुपरमैन बना हुआ था मैंने हर्षिता की चुदाई चालू राखी उसकी आवाज़े पुरे रूम में गूँज रही थी।
हर्षिता – बहन चोद तू आज मेरी चूत फाड़ ही देगा क्या कुत्ते। एहि मेरी इनकम का सहर है साले। इतना न चोद की किसी और से न चुद पाव कभी।
दीदी से रहा नहीं गया उन्होंने हर्षिता को हटा दिया और मेरा लंड चूसने लगी। मेरा लंड रॉड जैसा टाइट हो रखा था और एक दम डाउन नहीं हो रहा था।
मैंने कविता दीदी की चूत में लंड डाल डाला थोड़ा सा की वो चिल्ला दी। मेरी दीदी वर्जिन तो नहीं थी क्युकी राकेश ने दीदी की चुदाई की हुई थी कई बार। लेकिन मेरे जैसा लंड उसका नहीं रहा होगा।
दीदी की चूत में भचा भच लंड पेला। दीदी की हालत एक दम डाउन हो गयी उन्हें मैंने उल्टा किया और उनकी गांड में लंड डालने लगा , दीदी बोली नहीं ऋषि प्लीज वहा नहीं। बहुत दर्द होगा गांड में लंड डालने पे।
लेकिन उस वक़्त कविता मेरी बहन नहीं बस शरीर दिख रही थी मुझे और उसके शरीर के सरे हिस्से को मैं चोदना चाहता था। मैं एक न सुनते हुए दीदी की गाड़ में लंड डाल दिया। दीदी रोटी चिल्लाती रही मैं उन्हें चोदता रहा।
मेरा लंड झाड़ गया और मैंने उसे हर्षिता के बूब्स पे गिरा दिया।
हर्षिता को मैंने जाने नहीं दिया और फिरसे एक्टिव होक कविता दीदी और हर्षिता को चोदा।
अगले दिन मै दीदी से आंख नहीं मिला पा रहा था, और हम घूमने गए हर तरफ कपल देखके मैंने दीदी से कहा की कितना मज़े कर रहे है ये लोग और हम कितना बोर हो रह।
दीदी ने मुझे घूरते हुए कहा की तुम तो कुछ कहो भी मत, बहुत बुरे हो तुम।
मैंने कहा की क्यों क्या हुआ, मैंने तो कुछ नई किया। हस्ते हुए बोला।
मै होटल मैनेजर से मिला और बोला जब तक हु डेली दूध भेजते रहना। बहन के साथ हनीमून मेरी ज़िंदगी की सबसे बढ़िया ट्रिप थी। होटल जैसे ही मैं जाता दीदी को नंगा कर देता। उन्हें जो काम बी करना हो नंगे होकर ही करती थी।
दीदी की चुदाई मेरे लिए पानी पीने के जैसे सिम्पल हो गया जब मन हो जाता दीदी की चूड में लंड डालके चोदने लगता। दीदी भी पुरे मज़े ले रही थी सेक्स के।

दोस्तों प्लीज मुझे आप बताओ की मेरी कहानी बहन के साथ हनीमून आपको कैसी लगी।


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