होली में सगी बहन की चुदाई -अंकिता दीदी और सहेली आयेशा को साथ में चोदा

Holi me bahan ki chudai
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मेरी दीदी अंकिता भागते हुए घर में घुसी, उनकी सहेली आयेशा उन्हें रंग लगाने के लिए दौड़ा रही थी, दीदी का बदन भीगा हुआ था और उनकी चूचिया उछल रही थी, अंकिता दीदी के नुकीले निप्पल्स जो उनके टॉप से बहार झांक रहे थे को देखके मेरा लंड राकेट हो गया था और मैं होली में सगी बहन की चुदाई के सपने देखने लगा था।
अंकिता दीदी को आयेशा ने पकड़ लिया और उनके चेहरे के साथ गले में रंग लगाने लगी, रंग बहते हुए दीदी के टॉप अंदर जा रहा था और अंकिता दीदी के बूब्स अब ज्यादा झलकने लगे थे।
अंदर से मेरी भाभी निकली और बोली की आयेशा तुम्हे तो रंग लगाना भी नहीं आता, अपनी दोस्त को होली के दिन कोई ऐसे रंग लगता है क्या, और इतना कहते हुए रंग लेके दीदी के पास में आ गयी और उनके टॉप के अंदर हाथ डालके उनकी चूचियों में रंग लगा दिया।

Holi me bahan ki chudai
मैं खड़ा खड़ा सब देख रहा था , और अपने लंड को चुप करने की कोसिस कर रहा था। मैं शर्मा रहा था की कही कोई देख ले ना ले।
मेरा मन भी नहीं मन और मैंने पीछे से दीदी को रंग लगाने लगा और इसी बहाने अपना लंड सगी बड़ी बहन के गाड़ में घुसेड़ दिया, सब लोग मस्ती के माहौल में थे तो दीदी ने भी इतना गौर नहीं किया।
उस वक़्त मुझे थोड़ी देर रहा मिली, और मैं उन लोगो को होली खेलते हुए देख रहा था, भाभी ने मेरी दीदी के चूचियों को एक दम नीला कर दिया थ।
दीदी ने मुझसे कहा की तुम्हारी बहन को सब रंग लगा रहे तुम ऐसे देख क्या रहे हो , बाल्टी में रंग भरके लाओ भाभी को रंग से नहलाओ। बाल्टी में पहले से रंग भरके रखा था जो मैंने भाभी के ऊपर डाल दिया। इशिता भाभी भी रंग से डूब चुकी थी और उनकी साड़ी भी पानी से पुरे शरीर से चिपक गयी थी।
भाभी अब भागने लगी तो दीदी ने कहा की पकड़ो भाभी को जाने मत देना, आज भाभी को अच्छी होली खिलवाते है। मैंने भाभी को पकड़ लिया, आयेशा और अंकिता दीदी भाभी के पुरे शरीर में रंग लगा रही थी और मैंने भाभी को पीछे से पकड़ रखा था।
मेरा लंड भाभी की गाड़ में बहुत जोर जोर से घुस रहा था जो कही न कही भाभी को भी पता चल रहा था , दीदी ने मज़ाक मज़ाक में भाभी के ब्लाउज का हुक तोड़ दिया जिससे इशिता भाभी के बड़े बड़े तोते आज़ाद हो गए।
ये देखके मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन अंकिता दीदी को पता नहीं क्या हो गया था की जैसे वो भूल गयी की अपने सेज छोटे भाई के सामने ऐसी हरकत कर रही है।
दीदी अब भाभी की चूचियों में रंग लगनी लगी , पीछे मैंने भाभी की गाड़ में अंदर तक लंड डाल दिया था साडी के ऊपर से ही। मेरा मन हो रहा था की मैं भी भाभी की चूचियों को निचोड़ निचोड़ के रंग लगाउ।
मैंने भी हिम्मत करते हुए थोड़ा सा रंग भाभी के सीने और गर्दन में लगा दिया , भाभी बोली के देवर जी तुम इतना क्यों शर्मा रहे हो , लगा दो जहा रंग लगाना हो, मैंने झट से भाभी के बूब्स को रंग दिया।
अंकिता दीदी सब देखके है रही थी। भाभी ने मुझे आँखों से इशारा किया की मैं अंकिता दीदी को भी पकडू। मैं छुपके से दीदी के पीछे गया और उनके पकड़ लिया। दीदी बोली की अपनी बहन की तरफ से हो या भाभी की तरफ से। मैंने कहा की अपने भाभी को बहुत परेशान किया है।
अब भाभी की बारी हैं, भाभी एक हाथ आगे बढ़ गयी और उनकी अंकिता दीदी की टॉप को खसीट के उतर दिया। और उनके बूब्स में रंग मलने लगी। जीवन में पहली बार मैंने अपनी सगी बहन को अपने सामने नंगी देखा था।
मेरी दीदी की चूचिया मेरी आँखों के सामने मसली जा रही थी और मै कुछ भी नहीं कर पा रहा था, दीदी जितना छुड़ाने और बचने की कोसिस करती उनकी गांड मेरे लंड से उतना ज्यादा रगड़ खाती। दीदी को जैसे पीछे कुछ चुभन सा लगा तो उन्हने हाथ पीछे किया तो मेरा लंड उनके हाथ में आ गया।
दीदी पीछे घूम गयी और बोली की ये क्या चल रहा है, मैंने कहा की दीदी कुछ नहीं मैंने जानके नहीं किया ये बस ऐसे ही हो गया है खुदसे। भाभी बोली चलो अब देवर जी के साथ भी थोड़ी होली हो जाये और मुझे पकड़ रंग लगाने लगी।
दीदी ने मुझे पकड़ा हुआ था और उनकी चूचिया मेरी पीठ से चिपक रही थी , अंकिता दीदी के बूब्स काफी बड़े थे तो मुझे पूरा फील मिल रहा था, अचानक भाभी ने अपना हाथ मेरे अंडरवियर में डाल दिया और मेरे लंड पे रंग लगाने लगी।

Ankita didi ki chudai
दीदी प्लीज बचाओ, मैंने दीदी की तरफ आशाभरी नज़रो से देखा। अच्छा बेटा अब दीदी याद आ रही है और जब भाभी ने मेरे सरे कपडे फड़के रंग लगाए थे तो तुम्हे दीदी नहीं दिखी थी।
आयेशा आंखे फाड़ के मेरी लंड को देख रही थी और बोली की मैं भी गौरव को रंग लगाउंगी। आयेशा ने मेरा लंड हाथ में ले लिया लगाने लगी। लंड बहुत टाइट हो रहा था भाभी बोली की लगता है की देवर जी को कुछ हो रहा हैं।
दीदी ने कहा की मेरा छोटा सा भाई है ये इसे कुछ नहीं पता, भाभी बोली तुम जानती क्या हो ये आज मन ही मन होली में सगी बहन की चुदाई करने के सपने देख रहा होगा, और जो से हसने लगी।
गौरव तुम अपनी सगी बड़ी बहन के बारे में ऐसी बाटे सोचते हो? दीदी ने दुखी होक मुझे बोलै।
मैं – नहीं दीदी। कभी भी नहीं। आप किसकी बातो में आ रही हो। जानती हो न भाभी हमेसा बस मज़ाक के मूड में रहती हैं।
भाभी – अच्छा ठीक है अगर मै मज़ाक कर रही हु कोई बात नहीं। अंकिता जरा इसके लंड में रंग लगाना , देखना अभी इसकी मन की सच्चाई सामने आ जाएगी।
दीदी जैसे ही सामने आके मेरे लंड को देखि उसका चेहरा अजीब सा हो गया, उन्होंने कहा की गौरव ये इतना टाइट क्यों है। मैंने कहा दीदी ठंडी की वजह से हो गया है।
दीदी ने मेरे लंड को जैसे ही छुआ उसमे आग सी लग गयी। दीदी ने रंग लगाने के बहाने उसे हिलाया, मुझसे रहा नहीं जा रहा था बस मन में आ रहा था की होली में सगी बहन चुदाई करके उसकी आज गाड़ फाड़ दू।
भाभी – क्या हुआ देवर जी?
मैं – कुछ भी नही।
भाभी ने मेरा लंड पकड़ हिलना सुरु कर दिया और कहा की अब हुआ? मैं – नहीं। भाभी लंड को जोर से हिलाने लगी जिससे मेरे अंदर का माल बाहर आ गया।
वो सब लोग हसने लगे अब मेरा भी दिमाग ख़राब हो गया। मैंने कहा रिश्ते गए माँ चुदाने और मैंने अंकिता दीदी के बूब्स को पकड़ लिया।
छोड़ दो गौरव इसे सगी बहन से ऐसे करता है क्या कोई ?
मुझे कुछ नहीं सुन्ना था मैंने दीदी की गाड़ में लंड लगाया और बूब्स को मसलने लगा। आह मत कर गौरव प्लीज। मैंने दीदी की शॉर्ट्स को अब नीचे कर दिया और पैंटी के ऊपर से लंड रगड़ने लगा और टॉप के अंदर हाथ डालके बूब्स को मसलने लगा।
भाभी और आयेशा देखके मज़े ले रहे थे। भाभी ने मौके का फायदा उठाते हुए आयेशा का कुरता फाड़ दिया, और बूब्स को चूसने लगी। दीदी की पैंटी भी उतर दी मैंने और भाभी बहन सेक्स की जो हमेसा कल्पना की थी उसे सच कर दिया।
दीदी को मैंने सीधा किया और उनके होठो को चूसने लगा, दीदी भी अब मेरा साथ दे रही थी , दीदी के होठ बहुत मीठे थे ,मैं अंकिता दीदी के होठो को चूस रहा था और एक हाथ से उनकी चूत को सहला रहा था।
दीदी ने मेरे मुँह में अपने बूब्स को घुसेड़ दिया बोली की अपनी बहन को चोदना चाहता है न तू कुत्ते चोद ले आज अपनी सगी बहन को होली मे।
मैंने दीदी के दोनों बूब्स को पकड़के मुँह में भर लिया। मलाईदार चूचियों को मैं दबा दबा के चूस रहा और मेरी अंकिता दीदी शिशकीया ले रही थ। दूसरी तरफ भाभी इ आयेशा को नंगा कर दिया और उसकी चूत में ऊँगली कर रही थी।
आयेशा की नज़र मेरे लंड में थी। लेकिन मुझे तो बस अपने सगी दीदी की चूत मारनी थी , दीदी ने मुझे दक्का मारा और बेड पे गिरा लिया और मेरे मुँह पे बैठके बोली ले आज अपनी अंकिता दीदी की चूत चाट।
अंकिता दीदी की चुदाई सपने जैसा लग रहा था , मैंने दीदी की टांगे फैला दी और चूत में अपना मुँह लगाके स्वाद लेने लगा ,
दीदी – आह ओह आह। गौरव तू कितना कमीना निकला रे। कब से अपनी सगी बहन की चुदाई करने का प्लान कर रहा है।
मैं – दीदी आप हमेसा ही इतनी सुन्दर हो आपके नाम से मैंने कई बार मुठ मरी है। पिछली साल भी सोचा था की होली में सगी बहन की चुदाई का मज़ा मिल जाये तो क्या बात है, लेकिन हमेसा डर लगता था।
दीदी – अरे मेरा भाई अपनी दीदी की चूत का दीवाना है और मुझे पता भी नहीं चला। आज मैं होली के दिन अपने भाई की सारी ख्वाहिस पूरी करूंगी। तुझे अपने बहन की चूत चाइये न ले चोद ले अपनी सगी बहन को।
दीदी का ऐसा रूप तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था, मैं झट से अपना लंड निकल के दीदी की चूत में डाल दिया , दीदी आंखे बंद करके चुदाई का आनंद ले रही थी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। होली में सगी बहन की चुदाई करने का मौका मै इतिहास बना देना चाहता था। मैंने डैम लगाके लंड अंदर डाला तो दीदी की चीख निकल गयी। गौरव मैं तेरी सगी बड़ी बहन हु कोई रंडी नहीं हु बेटा , दर्द होता है मुझे।
धीरे धीरे अपनी बहन को चोदो। उधर आयेशा को अब बर्दास्त नहीं हो रहा था वो इशिता भाभी से अपनी चूत चटवा रही थी , भाभी ऊँगली डाल डाल के उसकी चूत क रस पि रही थी और होली में सगी बहन की चुदाई में लगा हुआ था।
आयेशा से रहा नहीं गया वो आयी और मेरा लंड अंकिता दीदी की चूत से बाहर निकल के अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। वो मेरे लंड को पागलो के जैसे चूस रही थी और बोली की बहन की सहेली की चुदाई करने का प्लान नहीं है क्या?
मैंने लंड उसकी गर्दन तक डाल दिया और उसके मुँह को चोदने लगा, उसको सांसे नहीं आ रही थी मैंने उसके मुँह के बहुत अंदर तक लंड ठास रखा था।
आयेशा – गौरव अब देर न करो और अपनी बहन के सहेली होली में चुदाई करके होली का मज़ा लो।
मैंने – आयेशा की चूत में लंड डाला तो देखा की उसकी चूत बहुत खुली हुई है। लग रहा था की आयेशा बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है। दूसरी तरफ अब मेरी मौसी अपनी चूत चटवा रही थी अंकिता दीदी से।
लेकिन मेरा तो अब बहन की होली में गांड मारने का था तो मैंने आयेशा की चूत से लंड निकला और दीदी की गाड़ में डाला दिया , दीदी उछल गयी और बोली की बेटा बता दो देते की तुम्हे दीदी की अपने गाड़ भी चॉदनी है।
दीदी झुक गयी और और मैं घपाघप दीदी की होली में गाड़ चुदाई करने लगा। दीदी की गाड़ बहुत मुलयाम और बड़ी थी ऐसा लग रहा था जैसे मुझे गद्दा मिल गया है।
मैं उछल उछल के दीदी के गाड़ में लंड डाल रहा थ। भाभी बोली की देवर जी बस अपने बहिन को ही चोदते रहोगे या भाभी की भी होली में चुदाई का नंबर आएगा।
मैंने सोचा क्यू न भाभी को भी चोद दू। तभी मुझे किसी ने तेज़ से आवाज़ दी गौरव गौरव जागो।
मैंने आंखे होली तो देखा दीदी मेरे सामने कड़ी है और बोली कितना देर से जगा रही हु , लगता है किसी सपने में खोये हुए थे। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है। इतनी हसीं दुनिआ कैसे ख़तम हो गयी।
मैं जगा और होली के लिए तैयार होने चला गया। अपने दोस्तों के साथ मस्ती की और वापस घर आ गया। है दूर से दीदी के निप्पल्स देखे हलके हलके उससे ज्यादा कुछ नहीं।
मैंने सोचा खास ऐसा सपना हमेसा आता रहे तो कितना मज़ा है।

दोस्तों प्लीज कमेंट करके बताये की आपको मेरा सपना कैसा लगा?


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